New post

E.S.CLASSES expect the best....

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

This is default featured slide 2 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

This is default featured slide 3 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

This is default featured slide 4 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

This is default featured slide 5 title

Go to Blogger edit html and find these sentences.Now replace these sentences with your own descriptions.

Thursday, September 3, 2020

                                                          सजीव जगत

सजीव जगत ऐसा जगत कहलाता है जिसमे जीवन पाया जाता है | मुख्यतया सजीव जगत को दो भागो में बांटा जाता है जंतु जगत और पादप जगत लेकिन बाद में Robert Harding Whittaker (27 December 1920 to  20 October) ने सजीवो को निम्नलिखित पांच जगतों में विभाजित किया है |



सजीव जगत के प्रकार (Robert Harding Whittaker) के अनुसार :-

  1. मोनोरा जगत :- इस जगत में जीवानुओ का अध्ययन किया जाता है |
  2. प्रॉटिस्टा जगत :- इस जगत में (अमीबा , पेरामिसियम) जैसे सजीवों का अध्ययन किया जाता है |
  3. कवक जगत :-इस जगत में (मशरूम, फफूंद ) जैसे - सजीवों का अध्ययन किया जाता है |
  4. पादप जगत(फ़्लोरा) :- जगतिस जगत में पौधों के बिषय में पढ़ा जाता है | किसी जगह के पादपो को फ़्लोरा कहा जाता है |
  5. जन्तु जगत (फौना) :- इस जगत में जंतुओं की बिषय में  पढ़ा जाता है | किसी जगह के जंतुओं को फौना कहा जाता है |






                              1. मोनेरा जगत 

  • मोनेरा जगत में सभी प्रकार के प्रोकेरियोटिक जीवों को सम्मिलित किया जाता है 
  • इस जगत के जीव प्रचिनानतम जीव है 
  • एंटोनी वॉन ल्यूवेन्हॉक (24 अक्टूबर, 1632 से अगस्त 30, 1723तक ) ने सूक्ष्म जीवों की ख़ोज की थी इसलिए इन्हें "सूक्ष्म जीवों का जनक"  कहा जाता है |
  • मोनोरा जगत को अध्ययन की सुविधा के लिए चार भागो में वर्गीकृत किया गया है :- जीवाणु (Bacteria),एक्टिनोमाइसिटीज (Actinomycetes) ,आर्कीबैक्टीरिया(Archeabacteria) ,साइनोबैक्टीरिया (Cyanobacteria)

     जीवाणु (Bacteria) :- जीवाणु एक कोशकीय जीव होते है ,जो सभी स्थानों पर पाए जाते है |

जीवाणुओं के लाभ :-

  • जीवनुओ से प्रतिजेविक ओषधियाँ बनायीं जाती है |
  • जीवाणुओं के कारणही दही जमता है |
  • जीवाणुओं के कारण ही पनीर बनता है |
  • जीवाणु ओं के कारण ही सिरका बनता है |
  • जीवाणु मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाते है |
  • जीवाणु खाद बनाने का में सहायक होते है | 

जीवाणुओं से हानि :-

  • जीवाणुओं से बीमारियाँ फेलतीहै |
  • जीवाणुओं के कारण ही भोजन ख़राब हो जाता है |

जीवाणु जनित रोग :-
  • गलघोटू
  • लंगड़ा बुखार
  • प्लेग 
  • लाल बुखार 
  • TB
  • निमोनिया
  • काली खासी

जीवनुओ से बचाव :-
  • जीवाणुओं से बचने के लिए खाद्य वस्तुओं को  आचार या मुरब्बा के रूप में या उनमे नमक डालकर रखा जाता है |
  • जीवाणुओं से बचने के लिए खाद्य पधार्थो को कोल्ड स्टोरेज में रखा जाता है | 
  • जीवाणुओं से बचने के लिए चीजों को गर्म करके रखा जाता है |




                                                          2. प्रॉटिस्टा जगत 

  • इस जगत के जीव मुख्या रूप से जल में पाए जाते है |
  • ये जीव स्वम्पोसी एवम् विषमपोसी दोनों प्रकार के होते है |
  • उदा. : प्रोटोजोआ (अमीबा ,पैरामीसियम आदि)
  • ये बीमारियाँ फेलाते है |



                                                            3.कवक जगत
  • कवक जगत के जीव सभी स्थानों पर पाए जाते है 
  • ये जीव बहुकोस्किये होते है |